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क्रीडांगन 'नवगुरुकुल' का वह क्षेत्र है, जहाँ खेल-कूद, व्यायाम इत्यादि की सारी गतिविधियाँ केन्द्रित हैं. यह निर्विवाद सत्य है कि सबल शरीर के अभाव में सशक्त व्यक्तित्व का निर्माण असंभव नहीं तो कठिन अवश्य हो जाता है. अतः आवश्यक है कि विद्यार्थी एवं शिक्षक खूब जमकर खेलें, स्वस्थ एवं सबल बनें. विकास की अवस्था में जब विद्यार्थी में प्रबल ऊर्जा का उदय होता है, तो वह ऊर्जा एक अभिव्यक्ति मांगती है. जिसने भी बच्चों को दौड़ते-भागते, खेलते-कूदते देखा है, उसने इस बात का अवश्य ही अनुभव किया होगा.

अतः क्रीडांगन नवगुरुकुल का वह विभाग है जो शरीर के विकास को समर्पित है. इश्वर के दिए इस शरीर रूपे यंत्र को हम किस प्रकार नियंत्रित कर सकते हैं, कैसे इसका विकास कर सकते हैं और इसे स्वस्थ, सुन्दर और पुष्ट बना सकते हैं, यह सिखाना एवं उसे जीवन में उतारना ही क्रीडांगन का लक्ष्य है.

नवगुरुकुल में सभी प्रमुख खेलों के मैदान एवं सुविधायें हो, यथा क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल, बास्केट-बॉल, वॉली-बॉल, लॉन-टेनिस, बैडमिन्टन, टेबिल-टेनिस, स्क्वैश इत्यादि. एक बढ़िया स्विमिंग पूल, एथलेटिक्स ट्रैक के साथ साथ शूटिंग, आर्चरी इत्यादि अपराम्परागत खेलों के प्रशिक्षण की सुविधा भी होनी चाहिए. पारम्परिक खेलों जैसे मल्लविद्या (कुश्ती), मलखम्ब, खो-खो, इत्यादि के साथ साथ जूडो-कराटे, कलारिपयाट्टु जैसी मार्शल-आर्ट्स के विशेषज्ञ भी नवगुरुकुल का हिस्सा बनें.



यही नहीं, सैनिक स्कूलों में सघन प्रशिक्षण के लिए जो स्पर्धायें एवं सुविधायें रहती हैं, कालान्तर में उन्हें भी नवगुरुकुल में सम्मिलित करना चाहिए.