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आज के समय में उत्तम शिक्षा संस्थानों का विनाश हो चुका है. आईआईटी एवं आईआईऍम जैसे नामी गिरामी संस्थान विद्यार्थी को उस उम्र में ग्रहण करते हैं जब उसके चरित्र की दिशा, उसके जीवनमूल्य इत्यादि लगभग निर्धारित हो चुके होते हैं. कहने की आवश्यकता नहीं, यह प्रायः अच्छी दिशा में नहीं जाते.

सब तरफ़ फैलती शराबखोरी, चरित्रहीनता एवं अश्लीलता इतनी भयानक है कि कभी कभी सोच कर ही डर लगता है कि हम अपने बच्चों को जिस परिवेश में बड़ा होता हुआ देखेंगे वह कितना भयानक होगा! और वे कैसे बनेंगे??

"हो चुकी है घाट पर पूरी व्यवस्था

शौक से डूबे जिसे भी डूबना है! "

-दुष्यंत कुमार, साये में धूप

सरकारें स्वयं दिशाहीन हैं. चीन ने गूगल फो अनुमति देते समय अपने देश की चारित्रिक एवं साँस्कृतिक सुरक्षा के अनुसार अश्लील वेबजालों को हटाने की शर्त इत्यादि रखी थीं. पर हमारी सरकार थी की उसे ख़याल ही नहीं आया कि अश्लीलता को रोका भी जाना चाहिए. गूगल वालों ने (अप्रत्यक्ष रूप से, मीडिया के माध्यम से) चीन के विरुद्ध दकियानूसी एवं पुरातनपंथी होने के खूब आरोप लगाए, पर चीन की सरकार ने वही किया जो उसे राष्ट्र के हित में करना था.(ध्यान रहे, मैं वैसे चीन का प्रशंसक नहीं हूँ)

परन्तु मनुष्य का स्वभाव ही ऐसा है कि वह अंत तक जूझना चाहता है.

क्या हम अपनी भावी पीढी को इतनी सुविधा से पतन के गर्त में जाते देखते रहेंगे? हमारे भावी पीढी शराब के नशे में डूब कर चारित्रिक पतन की एक के बाद एक सीढियां उतरती जायगी और हम कुछ नहीं करेंगे? क्या छद्म बुद्धिजीवियों की भांति हमारी भी ऊर्जा को जंग लग चुका है?

जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सम्पन्न लोग हैं वो सोच रहे होंगे कि नैतिकता और चरित्र तो ठीक है, पर छात्रों के लिए उनके कैरियर, विज्ञान एवं व्यवसाय की शिक्षा की बात होनी चाहिए; यह चरित्र-वरित्र कहाँ से आ गया?

..... (to be continued)

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